सीलिंग के कारण राजौरी गार्डन कामार्बल कारोबार तबाही की कगार पर


एम. ए. सिद्दीकी

नई दिल्ली। राजौरी गार्डन मार्बल डीलर एसोसिएशन (रजिस्टर्ड) की तरफ से आज  राजौरी गार्डन, रिंग रोड (मार्बल मार्किट) में जोरदार रोष प्रदर्शन एवं पुतला दहन किया गया। इंडियन ओवरसीज बैंक एवं कोटक महिंद्रा बैंक के पास इस प्रदर्शन में सैकड़ो मार्बल व्यपारियों और हज़ारों कर्मचारियों तथा उनके परिवार ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकारमॉनिटरिंग कमेटीमाननीय न्यायालयदिल्ली नगर निगम एवं सम्बंधित विभागों और अधिकारियो का ध्यान इस और दिलाना था ताकि मार्बल व्यापारियों और उससे जुड़े कर्मचारियों को राहत मिल सके ।राजौरी  गार्डन  मार्बल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंघल, महासचिव महिंदर सेठिया, कोषाध्यक्ष आनंद प्रकाश जाजू एवं समिति के सदस्यों नें सभी व्यापारी भाइयो और कर्मचारियों का कार्यक्रम को सफल बनाने धन्यवाद किया ।

राजौरी गार्डन मार्बल डीलर एसोसिएशन के चेयरमैन नवरतन झंवर ने इस बारे में कहा, “सीलिंग किसी नोटिस के बगैर किया गया है और यह सब अवैध है। इस सीलिंग से मार्बल उद्योग का भारी नुकसान हो रहा है। सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा हैमार्बल व्यापारी वर्गकर्मचारी और उनका परिवार काफी मुश्किल में है। एसोसिएशन सरकारमॉनिटरिंग समितिएमसीडी से तुरंत राहत की मांग करता है।”

इस अवसर पर दिल्ली मार्बल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण गोयल नें कहा, ” मार्बल डीलर एसोसिएशन और कर्मचारी सीलिंग का विरोध करते हैं और तुरंत डी-सील करने की मांग करते है।”

दिल्ली मार्बल डीलर एसोसिएशन के सचिव दिनेश जैन ने कहा, “सीलिंग व्यापारी समाज और कर्मचारियों पर खुला अत्याचार है।”

प्रमुख मार्बल डीलर स्टोनेक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक गौरव अग्रवाल नें कहा, “बाजार में हालात दिनों दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। किसी भी समय कोई अप्रिय घटना हो सकती हैसरकार और अधिकारी व्यापारी वर्ग के साथ यह सौतेला व्यपहार बंद करें और तुरंत राहत दें।”

मोनिटरिंग समिति के निर्देश के मुताबिक मार्बल मार्केट का एक भाग 19 अप्रैल 2018 को सील कर दिया गया था। यह कहते हुए कि मार्बल डीलर्स ने राजौरी गार्डन से मायापुरी के बीच रिंग रोड पर अतिक्रमण कर रखा था। जबकि तमाम सरकारी दस्तावेजों के अनुसार वे अतिक्रमणकारी नहीं हैं। सीलिंग के बाद से मार्बल डीलर कई बार मोनिटरिंग कमेटी से संपर्क कर चुके हैं। पर कुछ नहीं हुआ।

2021 के मास्टर प्लान को मानने की बजाय 19 अप्रैल के सीलिंग को सही साबित करने के लिए मोनिटरिंग कमेटी ने जोर दिया कि एसडीएम रिंग रोड को 210 फीट (63.8 मीटर) चौड़ी दिखाएं जबकि एमपीडी 2021 में यह 60 मीटर चौड़ी ही है। आरटीआई के जवाब नंबर 54 / सीपीडब्ल्यूडी111 / 1748 दिनांक 22.05.15 में लोकनिर्माण विभाग ने कहा है कि यहां रिंग रोड की चौड़ाई 60 मीटर है। (सभी दस्तावेज संलग्न है)। इस माप के आधार पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 99 संपत्ति स्वामियों को शनिवार, 13.07.2018 को नोटिस जारी कर कहा है कि वे 48 घंटे के अंदर अतिक्रमण हटाएं। इसमें कानूनन स्वामित्व साबित करने के लिए कोई नोटिस नहीं है।

एनके इंजीनियर्स नाम की एक कंपनी द्वारा किए गए सीमांकन के तीन वर्षों – 2008, 2010 और 2018 की रिपोर्ट रिकार्ड में है। इसके मुताबिक एक ही कंपनी, एक ही रिपोर्ट में अलग-अलग चीज दिखा रही है। 2008 और 2010 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि राजा गार्डन चौक से मायापुरी चौक के बीच रिंग रोड पर किसी संपत्ति स्वामी द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं है। जबकि यह स्पष्ट है कि 2018 की नई रिपोर्ट निगरानी समिति के दबाव में बनाई गई है। इस रिपोर्ट में एक और बड़ी गड़बड़ी है। एनके इंजीनियर्स की 02.07.18 की रिपोर्ट कहती है कि निगरानी समिति के 29.06.2018 के निर्देश के अनुसार, जो एक शुक्रवार था, एनके इंजीनियर्स को यह काम सौंपा गया कि वे रिग रोड के सीमांकन का सर्वेक्षण करें। इसके लिए इनलोगों ने 02.07.18 को रिपोर्ट सौंपी जो सोमवार था। स्पष्ट है कि निर्देश देने और रिपोर्ट के बीच कोई कार्य दिवस नहीं था और इससे गलत इरादों का पता चलता है।

किसी भी संपत्ति स्वामी ने कोई अतिक्रमण नहीं किया है इसका एक और सबूत है कि ऊपर बताई गई दो बिन्दुओं के बीच कई ऐसे हिस्से हैं जहां सीमांकन का काम किया गया है और जहां फुटपाथ बने हुए हैं। ये सड़क के केंद्र से माप कर मास्टर प्लान के अनुसार ही बनाए गए होंगे और 15 साल पहले बने थे। जाहिर है, फुटपाथ अतिक्रमण हटाकर बनाए गए होंगे और इसे सही व पूरी माप माना जा सकता है। यही नहीं, सभी 99 संपत्ति स्वामियों के पास उनकी अपनी संपत्ति के वैधानिक दस्तावेज हैं और यह उनके वास्तविक व दस्तावेजी क्षेत्र से मेल खाती है।

यही नहीं, जिन 99 संपत्ति स्वामियों को नोटिस सौंपे गए हैं, उनमें से 60, 21.07.2010 को ही दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा जीत चुके हैं। इसमें एसडीएम, मोनिटरिंग समिति और लोक निर्माण विभाग भी पक्ष थे। माननीय दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश स्पष्ट कहता है कि याचिकाकर्ता जिस स्थान का उपयोग कर रहे हैं वह कानूनन उनका है और वहां किसी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं है। निगरानी समिति की जिद्द पूरी करने के लिए एडीएम पटेल नगर ने इन संपत्तियों के खिलाफ भी नोटस जारी किए हैं जो स्पष्ट रूप से माननीय हाईकोर्ट की अवमानना है। मोनिटरिंग समिति ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि उन्हें गलत साबित किया जाए।


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