‘रेड’ में छा गये अजय देवगन


फिल्म ‘रेड’ अजय देवगन की बेहतरीन भूमिकाओं वाली फिल्मों में से एक है। ‘सिंघम’ और ‘गंगाजल’ जैसी फिल्मों में हम उनके वर्दी वाले ईमानदार किरदार को देख चुके हैं और इस बार बिन वर्दी वाले ईमानदार किरदार की बारी है। फिल्म की कहानी 1981 में लखनऊ में पड़े इनकम टैक्स विभाग के एक छापे की सत्य घटना पर आधारित है। फिल्म में अजय देवगन आईआरएस अधिकारी की भूमिका में हैं जो ईमानदार तो है ही निडर भी है और उसे जनता का समर्थन भी हासिल है। अजय की इस फिल्म में परफॉर्मेंस उनके प्रशंसकों ही नहीं बल्कि हर दर्शक को पसंद आयेगी।टैक्स छापे पर यह बॉलीवुड की पहली फिल्म है इसलिए इसकी कहानी भी आपको थोड़ी हट कर लगेगी। इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) का अफसर अमय पटनायक (अजय देवगन) ईमानदार है और वह सफेदपोशों के यहां छापे मार कर काफी माल बरामद कर चुका है। एक बार वह स्थानीय सांसद रामेश्वर सिंह उर्फ राजाजी सिंह (सौरभ शुक्ला) के यहां छापा मारता है। राजाजी का इलाके में अपना अलग रुतबा है और वह अपने गलत धंधों की भनक किसी को नहीं लगने देता। अब जब अमय रेड डाल चुका है तो वह पूरा प्रयास करता है कि राजाजी का असली चेहरा और कालाधन सामने आ जाये दूसरी ओर राजाजी भी कम नहीं है वह पूरा प्रयास करता है कि इनकम टैक्स विभाग के हाथ कुछ भी नहीं लग पाये। अंत में क्या होता है यह जानने के लिए फिल्म देखना ठीक रहेगा। अमय की पत्नी नीता पटनायक (इलियाना डीक्रूज) भी कहानी में बीच-बीच में आती रहती है जोकि अपने पति का हर तरह से समर्थन करती है।

अभिनय के मामले में अजय देवगन सब पर भारी पड़े हैं। वह एक्शन भूमिकाओं में जमते हैं और गंभीर दृश्यों में उनके चेहरे के हाव-भाव देखते ही बनते हैं। यह रोल सिर्फ उन पर ही फबता। राजाजी के रोल में सौरभ शुक्ला ने कमाल का काम किया है। वह इस रोल के लिए लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। इलियाना का काम भी अच्छा है हालांकि उन्हें फुटेज कम ही मिली है। अन्य सभी कलाकार सामान्य हैं। फिल्म का गीत संगीत ठीकठाक है। फिल्म की पटकथा काफी चुस्त है और फिल्म तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है। निर्देशक राजकुमार गुप्ता की ‘आमिर’ और ‘नो वन किल्ड जेसिका’ के बाद यह एक और बेहतरीन प्रस्तुति है।

Categories: फिल्म समीक्षा

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