बढ़े लोड पर सिक्योरिटी मनी वसूलेगा बीएसईएस


कार्यालय संवाददाता
नई दिल्ली। बिजली कंपनी बीएसईएस ने अपने सभी उपभोक्ताओं से बढ़े लोड के लिए सिक्यॉरिटी मनी वसूलने के लिए मई 2019 के बिल के साथ एक नोटिस भेजा है। नोटिस में यह साफ कहा गया है कि जिस उपभोक्ता के जितने किलोवाट लोड बढ़ा है उससे 600 रुपए किलोवाट के हिसाब से सिक्यॉरिटी मनी ली जाएगी। यह रकम जुलाई के बिल के साथ अन्य चार्ज के रूप में वसूली जाएगी। बीएसईएस की दोनों बिजली कंपनियों में अगर उपभोक्ताओं की सं या की बात करें तो वह 16 लाख के करीब है। वहीं अगर सिर्फ यमुनापार की बात करें तो उपभोक्ताओं की सं या 9 लाख के करीब बताई जाती है। मई 2019 में उपभोक्ताओं के घर जो बिजली के बिल भेजे गए उनमें सबसे ऊपर एक नोटिस भी लगा हुआ था। जब लोगों ने पूरे नोटिस को ध्यान से पढ़ा तब उन्हें पता चला कि उनके घर की बिजली की खपत बढने पर बिजली कंपनी ने यह नोटिस भेजा है। बिजली कंपनी ने एक अधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं के घरों में जो बिजली के मीटर लगे हुए हैं, उनके अंदर अधिकतम बिजली डिमांड इंडिकेटर (एमडीआई) लगा हुआ है। उपभोक्तओं के बिजली के मीटर से हर महीने मशीन से रीडिंग ली जाती है। इस मीटर से उन्हें यह पता चल जाता है कि उपभोक्ता के घर पर कब और कितनी बिजली की डिमांड रही। इसका पता लगाने के लिए पहली अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2019 की अवधि में लगातार चार महीनों के दौरान दर्ज बिजली की कोई भी चार सर्वोच्च मांगों का औसत निकाला जाता है। इस बात को बलबीर नगर के एक उपभोक्ता के बिल से समझा जा सकता है। बिजली कंपनी के नोटिस में यह साफ किया गया कि 2 दिसंबर 2018 से एक जनवरी 2019 के दौरान 3.14 किलोवाट रही। इसके बाद दो जनवरी 2019 से लेकर 31 जनवरी 2019 के दौरान 3.14 किलोवाट रही। वहीं, एक फरवरी 2019 से लेकर एक मार्च 2019 के दौरान 2.52 किलोवाट रही। मार्च में भी 2.52 किलोवाट की डिमांड रही। बिजली कंपनी ने इन चारों महीने का औसत निकालकर बिजली की खपत दो किलोवाट निकाली। जबकि उपभोक्ता ने एक किलोवाट का लोड लिया हुआ है। लिहाजा बिजली कंपनी ने उपभोक्ता से एक किलोवाट की सिक्यॉरिटी मनी के रूप में 600 रुपये जमा कराने के लिए कहा है। बिजली कंपनी ने उपभोक्ता को अपना विरोध दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय भी दिया है। यदि इस बीच कोई उपभोक्ता विरोध दर्ज नहीं कराता है तो इसे उनकी स्वीकृति माना जाएगा। बिजली कंपनी के अधिकारी का कहना है कि यह रूटीन प्रोसेस है। डीईआरसी की गाइडलाइन के हिसाब से ऐसा किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर अगले वित्त वर्ष में किसी उपभोक्ता का लोड कम हो जाता है तो उस उपभोक्ता ने जितने किलोवाट की सिक्यॉरिटी मनी जमा कराई थी उस पैसे को बिल के रूप में अजस्ट कर लिया जाएगा।


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