दलित मुस्लिम अधिकार सम्मेलन का हुआ आगाज


तानाशाही हटाओं, लोकतन्त्र बचाओ
मो.अनस सिद्दीक़ी

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के अम्बेडकर नगर विधानसभा के अन्तर्गत दलित मुस्लिम अधिकार सम्मेलन का किया गया आगाज। इस अवसर पर पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों की शहादत पर श्रद्धांजलि भी दी गई। इस अधिकार सम्मेलन में मुखतलिफ सियासी पार्टियों के नुमाईदों ने भी शिरकत की। इस सम्मेलन में सत्ताधारी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए एक ध्वनि से पारित किया गया कि तानाशाही हटाओं, लोकतन्त्र बचाओ की शुरूआत की जाये। कार्यक्रम का संचालन बिहार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हाफिज गुलाम सरवर किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया, अम्बेडकर नगर विधानसभा के विधायक अजय दत्त, एडवोकेट सज्जाद हुसैन, कांग्रेस नेता फिरदोसी, धर्मगुरू संत श्री चीमा जी महाराज, कांग्रेस कमेटी एससीएसटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील कुमार, महरोली के निगम पार्षद दिनेश चौधरी, युवा बाल्मीकि समाज दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विकास कांगड़ा, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भानु प्रताप सिंह, विनोद संगत, राजपाल वघेल, पूर्व दिल्ली हज कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समी सलमानी, त्रिवेणी भारती, रश्मी गंगवाल, पूर्व सदस्य राष्ट्रीय उपभोक्ता परिषद, कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के शफीक अमीद (बन्टी), लाखन सिंह गौतम तथा अंत में अखिल भारतीय उलित-मुस्लिम य,ूनाईटेड मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक इन्जी. डी.सी. कपिल सहित दर्जनों वक्ताओं ने दलित मुस्लिम अधिकार सम्मेलन शामिल हुए हजारों कार्यकर्त्ताओं को संबोधित करते हुए शिरकत की।
एडवोकेट भानु प्रताप ंिसंह ने कहा कि जिस समय इस सभा को करने का निर्णय लिया गया था उस वक्त परिस्थति कुछ और थी और अब पिछले चार दिनों मं परिस्थितियां बदल गई है। पीड़ित परिवार एवं दुखी परिवार को इस दुख को सहने की परमपिता शक्ति दे। लेकिन पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए फिदायीन हमले की जांच होनी चाहिए। जब गुप्तचरों से पहले ही चेतावनी मिली हुई थी कि बड़े पैमाने पर फिदायीन हमला हो सकता है। उसके बावजूद कोई सतर्कता नहीं बरती गई बल्कि लापरवाही बरती गई। साढ़े तीन सौ किलो आरडीएक्स लेकर सीआरपीएफ काफिले तक आतंकी कैसे पहुंच गए। किस स्तर पर चूक हुई और उसके विरूद्ध अभी तक कोई भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस मामले की जांच होनी चाहिए।
अम्बेडकर विधानसभा से विधायक अजय दत्त ने कहा कि हमको जागरूक होना होगा। मौजूदा सरकार एवं सत्ताधारी दल लोकतन्त्र को खत्म कर मनु का संविधान लागू करने की चेष्ठा कर रहे हैं। मुसलमानों के विरूद्ध दंिलतों से लड़ाने का अब तक काम किया गया है। वोट और मुसलमानों से लड़ने के लिए केवल दलित हिन्दू होता है। वरना उसको दलित ही माना जाता है। इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपना सोच समझकर वोट का इस्तेमाल करना है।
अखिल भारतीय दलित-मुस्लिम युनाईटेड मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक इंजी डी.सी. कपिल ने कहा कि इस सगंठन का मकसद आपसी भाईचारा स्थापित करके देश के हर नागरिक की शैक्षणिक, आर्थिक ओर सामाजिक मूल्यों की सुरक्षा करना है। बाबा साहेब डा. भीम राव अम्बेडकर जी द्वारा बनाये गये सविंधान में पूर्ण आस्थार खते हुए संवैधानिक दायरे में रहते हुए अपने अधिकारों की रक्षा करना है। मॉब लिचिंग और जातीय नस्लवाद की आड़ में भगवा आतंकवाद का जमकर विरोध करना और देश में दलितों और मुस्लिमों पर हो रहे जुल्मों और अत्याचारों का मुंह तोड़ जवाब देना है। देश को दंगामुक्त ओर नंगा मुक्त बनाने के लिए देश को दलितों और मुस्लिमों को एक सूत्र में बांधकर उन्हें उनके एतिहासिक भाईचारे की याद दिलाने के लिए भी इस संगठन ने जन-जागरण के माध्यम से एक अनुपम शुरूआत की है। देश में मुस्लिम (लुटे हुए) और दलित (पिटे हुए) एक ही जैसे हालातों में घुट-घुट कर जी रहे हैं।
डी.सी. कपिल ने यह भी कहा कि हिन्दुत्व के नाम पर देश में दलितों को हमेशा मुस्लिमों से लड़ाया जाता रहा। दंगों को हिन्दु-मुस्लिम का नाम दिया जाता रहा है, जबकि कोई भी दंगा हिन्दु-मुस्लिम का हुआ ही नहीं हैं ये सभी दंगे दलित और मुस्लिमों के कराये जाते रहे और कराने वाले राजनैतिक रोटियां सेकते रहे और गोटियां भी फिट करते रहे। उन्होंने सम्मेलन में आये श्रोताओं से आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है राजनैतिक पार्टियों के इस षडयंत्र को पहचाना जाये और भाईचारे की तरफ एक कदम बढ़ाते हुए, अपने अधिकारों की रक्षा के िलए सभी दलित और मुस्लिम एकजुट हो जाएं और अपनी आर्थिक, सामाजिक स्थिति को सुधारने के साथ ही साथ राजनैतिक सत्ता की ओर मिलकर आगे बढ़ें। अंत में डी.सी कपिल ने सभी लोगों से अपील करते हुए पुलवामा में शहीद हुए 43 सीआरपीएफ के जवानों और मॉब लिचिंग में मारे गए सभी दलित एंव मुस्लिमों को श्रद्धाजंलि के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।


Categories: देश,राजनीति

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