कांग्रेस चाहे तो मोदी और शाह की जोड़ी को 18 सीटों पर हराया जा सकता है : मनीष सिसोदिया


नदीम अहमद

नई दिल्ली। शनिवार को पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछले एक महीने से गठबंधन को लेकर कांग्रेस का जो ढुलमुल रवैया देखने को मिल रहा है उससे एक बात स्पष्ठ हो गई है कि कांग्रेस की प्राथमिकता भाजपा की तानाशाही से देश को बचाना नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को जीतने में मदद करने की है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि शुरू से ही कांग्रेस के प्रति हमारा विरोध रहा है। परंतु आज देश में जो हालात हैं जिस प्रकार से भाजपा ने देश के सामाजिक ढांचे की, देश के सरकारी संस्थानों की, देश के व्यापार की, देश के आम आदमी की और देश के शिक्षण संस्थानों की जो दुर्दशा कर दी है, उसको देखते हुए आम आदमी पार्टी ने तय किया था, कि मोदी और शाह की इस तानाशाह जोड़ी को सत्ता से हटाने के लिए आम आदमी पार्टी बीजेपी विरोधी पार्टियों से भी हाथ मिलाने को तैयार होगी।

आम आदमी पार्टी का यह मानना है कि अगर सारी भाजपा विरोधी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव लड़े तो मोदी और शाह की तानाशाही से इस देश को आजाद कराया जा सकता है। इस बाबत ही आम आदमी पार्टी ने महागठबंधन का हिस्सा बनना स्वीकार किया। दिल्ली की परिस्थितियों को देखते हुए कई विपक्षी पार्टियों ने भी हमें सलाह दी कि दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाए, ताकि दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा को हराया जा सके। इसी के चलते दिल्ली में कई बार कांग्रेस के नेताओं से बातचीत भी हुई।

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह बड़ा ही आश्चर्यजनक है कि इतनी बड़ी पार्टी कांग्रेस देश के ऊपर मंडरा रहे खतरे को समझ नहीं पा रही है। पिछले 1 महीने से जिस प्रकार से कांग्रेस की तरफ से गठबंधन को लेकर ढीलापन अपनाया जा रहा है, वह बेहद ही चिंताजनक रहा है। पिछले 1 महीने से कांग्रेस एक छोटे से मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले पा रही है जिसके कारण 1 महीने का बेहद कीमती समय खराब हुआ।

अभी पिछले 1 हफ्ते से दोबारा से कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत शुरू की। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समक्ष भाजपा को 33 लोकसभा सीटों पर रोकने का प्रस्ताव रखा। इन 33 सीटों में 7 सीटें दिल्ली की, 10 सीटें हरियाणा की, 13 सीटें पंजाब की, 1 सीट चंडीगढ़ की और 2 सीटें गोआ की शामिल हैं। वर्तमान में इन 35 सीटों में से 23 सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। अगर कांग्रेस हमारे इस प्रस्ताव पर गौर करती तो 2014 के मुकाबले सीधे-सीधे तौर पर 23 सीटों का नुकसान भाजपा को पहुंचता।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमें लगता है कांग्रेस ने जानबूझकर कोई भी निर्णय लेने में देरी की है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस इस पर निर्णय नहीं ले सकती थी, परंतु जानबूझकर कभी एक नेता के द्वारा तो कभी दूसरे नेता के द्वारा अलग-अलग बातें कही गई। ताकि भाजपा को अपनी चुनावी रणनीतियां बनाने का समय मिल सके। उन्होंने कहा, कि हमारे प्रस्ताव पर कांग्रेस ने कहा, कि केवल दिल्ली की 7 सीटों पर गठबंधन करेंगे। क्या ऐसा करके कांग्रेस बाकी की 26 सीटों पर भाजपा को जिताना चाहती है? दिल्ली में आम आदमी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार है, और दिल्ली में आम आदमी पार्टी अपने बल पर ही सातों सीटें जीत सकती है। परंतु केवल दिल्ली की सीटें जीतना ही आम आदमी पार्टी का लक्ष्य नहीं है। देश के संविधान को बचाना हमारी प्राथमिकता है, जिसके चलते हमने गठबंधन करने के बारे में सोचा था। अब यह कांग्रेस को तय करना है कि इस समय उनकी प्राथमिकता मोदी और शाह की जोड़ी को हराना है या ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का रिकोर्ड बनाना है।

कांग्रेस के इस गोलमोल रवैया को देखते हुए एक बात तो साबित हो गई कि देश से मोदी और शाह की तानाशाह सरकार को हटाना कांग्रेस का मकसद नहीं है। मनीष सिसोदिया ने कहा क्योंकि गोवा का टाइम निकल चुका है, तो उस पर बात करना व्यर्थ है, और कांग्रेस की माने पंजाब में दोनों ही पार्टियां एक पक्ष में है और दूसरी विपक्ष में है वहां भी गठबंधन न करना एक बार को समझ आता है। परंतु हरियाणा और चंडीगढ़ में गठबंधन ने करने का क्या कारण है? अगर कांग्रेस चाहे तो अभी भी समय है, मोदी और शाह की जोड़ी को 18 सीटों पर हराया जा सकता है। अगर कांग्रेस दिल्ली के साथ साथ हरियाणा और चंडीगढ़ में भी गठबंधन करने के लिए तैयार है तो आम आदमी पार्टी भी गठबंधन के लिए तैयार है।

आम आदमी पार्टी मोदी और शाह की तानाशाह जोड़ी को देश की सत्ता से हटाने के लिए हर स्तर पर तैयार है। अगर कांग्रेस गठबंधन के हमारे फार्मूले पर राजी है, तो आम आदमी पार्टी भी भाजपा को हराने के लिए गठबंधन करने को तैयार है।


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